इन जल्लादों को मार दो

 

क्या सच में इस्लाम शांती का प्रतीक है? क्या सच में रमजान पवित्र महिना होता है? क्या सच में आतंकवाद का कोई धर्म नही होता? क्या सच में सब लोग एक जैसे नही होते? क्या ये सच हैं? क्या ये सच हैं? क्या ये………सच हैं? अगर ये सच है तो कश्मीर में सारे मुसलमान एक जैसे कैसे निकले? सब ने मिलकर एक नेक देशभक्त मुसलमान डीवायएसपी मोहम्मद आयुब पंडित जो अपना कर्तव्य निभा रहा थे उस पुलिस अफसर को सब ने मिलकर क्यों मारा? जो उनकी ही रक्षा कर रहा था. वो भी इस्लाम का बंदा था. वो भी नमाज अदा करता था. उसने भी रोजे रखे थे. वो भी तो एक कश्मीरी था. आप मस्जिद में जाते हो, नमाज अदा करते हो, सब मिलकर बाहर आते हो, जो आपकी सुरक्षा कर रहा है, आपकी हिफाजत कर रहा है, उसको आप सेकडों की तादात में इकठ्ठे हुए लोग मस्जिद से घसीटते हुए 300 फीट की दूरी पर लेकर जाते हो, उसको नंगा कर के पत्थर से कुचलते हो. इतना मारते हो की उसकी लाश को पहचान पाना भी मुश्किल हो. क्या ये सिरिया हैं? क्या यहां तालिबानी हुकूमत हैं? नही, ये हिंदुस्थान है और हिंदुस्थान अपने देश के जवान बेटे के खून का बदला जरूर लेगा. एक एक हरामी को चुन चुन के मारेंगे हमारे जवान. अबे सुअर की औलादों जरा हमे भी तो बताओ की कौनसे कुरआन में लिखा है की जो आपकी सुरक्षा कर रहा है उसको ही जान से मार दो? वो भी रमजान के (पवित्र?) महिने में ऐसे घिनोने काम को अंजाम दो? मारनेवाला भी मुसलमान और मरनेवाला भी मुसलमान. क्या अब इस्लाम खतरे में नही आया? अगर आया हैं, तो किस की बजह से आया हैं? क्या ये इस्लाम के खिलाफ नही हैं? सब से बडा सवाल है, अंदर…….. कौन था? क्या अल्ला ने आपको आदेश दिया की जाओ मेरा एक नेक बंदा बाहर खडा होकर आपकी हिफाजत कर रहा है उसे कुचल दो? उसके छोटे, छोटे बच्चों को अनाथ कर दो? उसकी बिबी को विधवा बना दो? तब जाकर तुम्हारी दुआ कबूल होगी? अगर आप लोग सही है तो इस्लाम गलत है. अगर इस्लाम की नजर में आपका काम सही है तो फिर इस्लाम शांती का प्रतीक नही है. वो साला हरामी सुअर मिरवाईज मस्जिद के अंदर से आपके कान में मुतता है और आप बाहर आकर अपने ही कश्मीरी भाई को पत्थर से कुचलकर जान से मार देते हो. अबे हरामियों के पिल्लो तुम्हारा खुदा, अल्ला कौन है? वो पाकिस्तान के फेके हुए पैसों पर पलनेवाला आतंकी मिरवाईज उमर फारूक? क्या ये तुम्हारा खुदा हैं? क्या ये अल्ला हैं?

कश्मीर के हालात के लिये खुद कश्मीरी लोग जिम्मेदार है और जिम्मेदार हैं कश्मीर की मेहबूबा सरकार, जिसने इन अलगदावादी नेताओं को और उनकी देशद्रोही हरकतों को हमेशा नजरअंदाज कर के उनको सपोर्ट किया. जितनी मेहबूबा सरकार जिम्मेदार है उतनी ही भूतपूर्व अब्दुल्ला सरकार भी जिम्मेदार है और उतनी ही जिम्मेदार केंद्र की काँग्रेस सरकार और अभी की मोदी सरकार भी कुछ हद तक जिम्मेदार है. जो अब्दुल्ला सरकार ने किया वही आज मेहबूबा की सरकार कर रही है. जो भूतपूर्व काँग्रेस की सरकार ने किया, कुछ हद तक आज की मोदी सरकार भी वही कर रही है. सिर्फ चेहरे बदले है लेकिन काम करने का तरीका वही हैं. मोदी सरकार को भी वहां के हालात पर काबू पाने में कुछ खास कामयाबी नही मिली है. मिरवाईज, गिलानी, सैद सल्लाउद्दीन, यासिन मलिक इनकी जगह सलाखों के पिछे है. अलगदावादी इन जिहादी आतंकी नेताओं पर हिंदुस्थान की सरकार ने पिछले पांच सालों में ५०० करोड रु. खर्चा किया है. इसमे उनकी गाडीयों के उपर 26.41 करोड, सुरक्षा के उपर 309.50 करोड, PSOS की सैलरी के उपर 109.90 करोड रु इतना खर्चा हुआ है. इसका कुल मिलाकर हिसाब होता है 485.81 करोड रुपया. इतना खर्चा करके हम किसको संभल रहे है इन अस्तिन के सापों को, जो हमको तबाह करने पर तुले है. मोदी सरकार से हिंदुस्थानी जनता को बहोत उम्मीदे हैं. उनपर भरोसा भी है. फिर भी मन में बार बार सवाल ये आता है की सारे फसाद की जड ये गद्दार अलगदावादी सुअर है. ये प्रधानमंत्री मोदीजी को भी पता है, फिर भी ये हरामी जिंदा क्यों है? और तो और उनपर इतना करोडो रु क्यों खर्चा किया जा रहा है? पहले आप नही थे. पिछले 3 सालों से आप की सरकार है. फिर भी इन हरामीयों का दानापाणी अभी तक बंद क्यों नही हुआ? इन गद्दारों को मौत के घाट उतार दो, कश्मीर घाटी में शांती आ जायेगी. पाकिस्तान से बाद में निपट लेंगे. पहले इनको ठिकाने लगा दो.

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*कश्मीर की धरती मांग रही है अलगदावादीयों का खून,*

*तभी मिलेगा मोहम्मद आयुब की आत्मा को सुकून*

कश्मीर पुलिस का इतना बडा अफसर मारा गया. ना सोनिया गांधी की तरफ से कोई बयान आया, ना लेफ्ट पार्टीज की ओर से कुछ बयान आया, ना लालू बोला, ना मुलायम बोला, ना माया बोली, ना ममता जागी, ना ओ हैदराबाद के तुर्रेवाले मुर्गे ओवेसी भाई कुछ बोले, और ना ही याकूब मेमन की फांसी रोकने के लिये रातभर ट्विट करनेवाला सलमान खान कुछ बोला, ना आमिरखान कुछ बोला, ना हकला शाहरुख बोला, ना सैफ बोला, ना महेश भट्ट बोला और ना ही देश का कोई इमाम बोला ना कोई मुल्ला बोला, ना देश का कोई मुसलमान बोला. क्यों भाई रमजान चालू है, उसका तो लिहाज करते? मोहम्मद आयुब पंडित हमारा भाई था. उसके दो छोटे बच्चे, बीबी आज अनाथ हो गयी. उसके बुढे मां-बाप, उसकी बहन जो शब के लिये आयी थी उसको इन सुअरों ने भाई का शव तोहफे में दिया. जो मरा ओ भी मुसलमान, जिसने मारा वो भी मुसलमान फिर कौनसा मुंह लेके इस हिंदुस्थान का मुसलमान आज ईद मना रहा है? अरे आपने खुद को कपडे लिये, बीबी, बच्चो को लिये, अम्मा को लिये, अब्बा को लिये. लेकिन कश्मीर में तुम्हारा एक भाई था, जिसको तुम्हारे ही कौम के लोगों ने मार दिया. उसको भी दो छोटे बच्चे हैं, अम्मी है, अब्बू है उनको कौन कपडे लेके देगा? तुम्हारी कौम ने उनको कफन और उनके बेटे की लाश भेंट दे दी. अगर कुछ तो शरम है तो इस साल ईद मत मनाओ. तुम सब एक जैसे नही हो ये दिखाओ. सिर्फ बोलो मत साबीत करके दिखाओ. अगर एक साल ईद नही मनाओगे तो कुछ फर्क नही पडेगा. कुछ बुरा नही होगा. जो बुरा होना था वो तो हो गया. आज कश्मीरी लोगों को भी समज में आया होगा की इन सुअर, गद्दार अलगदावादी नेताओं का साथ देने से क्या हासिल हुआ? जो पत्थर सेना के जवानों को मारने के मकसद से जमा कर के रखे थे, उन्ही पत्थरों ने आज एक कश्मीरी की जान ली. जिन्होंने सेना के जवानों को मारने के लिये हाथ में पत्थर थमा दिये थे. उन्होंने ही डीवायएसपी मोहम्मद आयुब पंडित की जान ली. इसमे कोई दो राय नही की मोहम्मद हमारे देश का एक बहादूर देशभक्त और ईमानदार सिपाही था. फिर भी आज एक बात कहना चाहता हूं. जो कश्मीरी आज मोहम्मद आयुब के लिये रो रहे है, वो एक बात समज ले, की जो खून की आंसू आज आप बहा रहे हो ऐसे खून के आंसू हिंदुस्थान रोज बहाता हैं, बरसों से हम बहा रहे है. जब कश्मीर में हमारे जवान मारे जाते हैं. हिंदुस्थान ने कश्मीरीयों के लिये बहोत जवान खोये है. आपके हित के लिये हमने बहोत सी कुर्बानीयां दी है. जो दर्द आज आप महसूस कर रहे हैं. उसे हम बरसों से झेलते आ रहे है. फिर भी हमें सबसे ज्यादा दुख तब होता हैं जब आप मिरवाईज, गिलानी, सैद सल्लाउद्दीन और यासिन मलिक जैसे गद्दारों के कहने पर मेरे कश्मीर के सीने में पाकिस्तान का झंडा गाड देते हो, लहराते हो. बात को समजो जो मोहम्मद आयुब पंडित का और आप का दुश्मन है, वो ही तो बरसों से हमारा भी दुश्मन है. हत्या करनेवाले ये अलगदावादी हरामी है, लेकिन करवानेवाला पाकिस्तान है. हमारा दुश्मन एक हैं. हम सब एक है. अगर एक नही रहोगे, तो नेक भी नही रहोगे. इन सुअरों के हाथो मारे जाओगे. इसलिये कश्मीरीयों आंखे खोलो और जिन हरामीयोंने हमारे मोहम्मद आयुब को मारा है उन सबको चुन चुन के मारो. एक भी सुअर छूटना नही चाहिये. कश्मीर में जिधर भी ये सुअर मिरवाईज, यासिन मलिक, गिलानी, सैद सलाउद्दीन दिखे हरामीयोंको पत्थर से कुचलकर जान मारो. एक भी गद्दार जिंदा नही बचना चाहिये. आप नही करोगे तो फिर भी ये नेक काम हिंदुस्थान की सेना जरूर करेगी. उनको कफन भी नसीब नही होने देगी.

कश्मीर की धरती की एक ही मांग, मिटा दो अलगदावादीयों का नामोनिशाण.

One comment

  1. मी तुझ्या विचारांशी पूर्ण सहमत आहे.परखडपणे विषय मांडला आहेस. अत्यंत परिणामकारक.
    …..।डॉ. खानोलकर.

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